मेष लग्न के कुंडली में सूर्य का प्रभाव

मेष लग्न में पंचमेश सूर्य का बारहों भाव में क्या - क्या प्रभाव देंगे इसकी एक छोटी सी कोशिश की गई है यह पूर्ण नहीं है क्योंकि इसके लिए जातक की पूरी कुंडली का विश्लेषण करना होता है किसी भी निष्कर्ष पर जाने से पहले |

Apr 17, 2026 - 21:42
May 3, 2026 - 19:54
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मेष लग्न के बारहों भाव में सूर्य क्या क्या प्रभाव और फल दे सकतें हैं | 

आज हम इसी पर चर्चा करेंगे | 

"मेष लग्न के लिए सूर्य"

मेष लग्न में सूर्य त्रिकोण भाव के पंचम भाव के स्वामी होते हैं |

सूर्य का सिंह राशि का स्वामी होते हैं 

जो की मेष लग्न के पंचम भाव में आता है,

इसलिए सूर्य मेष वालों के लिए बहुत ही योगकारी ग्रह बन जाते हैं |

और पंचम भाव का सीधा सबंध  "संतान "शिक्षा "बुद्धि "प्रेम संबंध और प्रेम विवाह का होता है |

मेष लग्न के प्रथम भाव में सूर्य 

यहाँ पर सूर्य उच्च के हो जाते हैं | मेष लग्न में बैठे सूर्य वाला व्यक्ति अथाह मेहनती' साहसी' बुद्धिमान' और ज्ञानवान होता है   |

मेष राशि अग्नि तत्व की राशि है यहाँ पर सूर्य होंगे तो इस अग्नि को और भी ज्यादा तेज कर देंगे |

जिसके वजह से, ऐसा व्यक्ति के कुछ भी पाने की जो ललक होती है वह जल्दी शांत नहीं होती है, जैसे अग्नि में जितना ईधन डालोगे 

वह उतना ही बड़ा आकार ले लेती है फिर भी उसकी प्यास बनी रहती है वैसे ही लग्न का सूर्य वाले व्यक्ति के महत्वाकांक्षा की जो प्यास होती है जल्दी मिटती नहीं है |

लग्न में बैठकर अपनी सप्तम दृष्टि से सीधा सप्तम भाव को देखेंगे जहां पर सूर्य की नीच राशि तुला होता है,

जिसके वजह से वैवाहिक जीवन में थोड़ी सी कठनाई आ सकता है, क्योंकि सूर्य की दृष्टि भी जलाने वाली काम करती है जिससे जिससे पट्टी पति पत्नी मे हमेशा होती रहती है 

हालांकि इसके लिए पूरी कुंडली देखनी होती है , फिलहाल कुल मिलाकर 

जातक को सरकारी नौकरी, प्रशासन, पुलिस, सेना में सफलता मिल सकती है |

व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान  दबदबा बहुत रहता है 

संतान से सहयोग मिलता है , अमूमन एक ही संतान ऐसे लोगों की होने की संभावना होती है और बहुत ही प्रभावशाली होता है | 

सावधानी : अपने क्रोध पर नियंत्रण बनाए रखे |

मेष लग्न के द्वितीय भाव में सूर्य

सूर्य यहां व्यक्ति को अपने बुद्धि' ज्ञान और प्रयासों से धन कमाने की प्रेरणा देता है। सरकारी क्षेत्र, प्रशासन या नेतृत्व से जुड़े कार्यों में लाभ मिलता है । 

आस पास के और परिवार लोगों से कभी-कभी विरोध का सामना करना पड़  सकता है |

फिर भी धन के लिए अच्छा रहेगा और वाणी बहुत ही प्रभावशाली होती है ऐसे लोगों की |

सूर्य की दशा - अन्तरदशा में ज्ञान और बुद्धि के बल से धन आते रहते है |

संतान के कार्यों से समाज में मान सम्मान मिलता रहता है | 

सावधानी : सूर्य की दशा चल रही हो तो अपनी सेहत पर ध्यान दें क्योंकि सूर्य की सप्तम dristiलग्न के बारहों भाव में सूर्य क्या क्या प्रभाव और फल दे सकतें हैं | 

मेष लग्न के तृतीय भाव में सूर्य

यहाँ तृतीय भाव में सूर्य अपने परममित्र बुध की राशि मिथुन होंगे तो व्यक्ति निडर, आत्मविश्वासी और बेहद पराक्रमी होता है। ऐसे लोग अपने बुद्धि ज्ञान के दम पर आगे बढ़ते हैं और चुनौतियों से नहीं घबराते हैं।

छोटे भाई-बहनों के साथ कभी-कभी अहम  के वजह से टकराव और मतभेद हो सकते , हालांकि इसके लिए बुध की स्थिति को भी देखना होगा | 

एक और बात जो भी संतान होंगे वह बहुत ही बुद्धिमान' और कई  विषयों में गहरी जानकारी और काफी भाग्यशाली होते हैं |

जातक भी बहुत भाग्यशाली होता है, सूर्य के सप्तम दृष्टि नवां भाव पर होती है जहां पर सूर्य के परम मित्र गुरु की धनु राशि होती 

जिस वजह से ऐसे लोग बहुत ही धार्मिक होते हैं और बड़े लोगों का सहयोग मिलता रहता है |

सावधानी : छोटे भाई -बहनों और बड़े लोगों से सबंध को मधुर बनाए रखे |

मेष लग्न के चतुर्थ भाव में सूर्य

सूर्य यहाँ अपने मित्र चंद्रमा के के राशि होंगे, जिस वजह से ज्यादातर फल शुभ ही होते हैं |  यहाँ पर बैठकर माता के स्वास्थ्य मे थोड़ी सी परेशानी देते हैं| सूर्य अपनी सप्तम दृष्टि अपने परम शत्रु शनि की राशि मकर पर डालेंगे

जिसके कारण माता-पिता के सबंधों मे थोड़ी सी मतभेद रहते हैं हालांकि इसके लिए पूरी कुंडली देखनी होती है, फिलहाल सूर्य की बात करे तो संतान को घर से दूर जाकर शिक्षा लेते है |

समाज में और कर्मक्षेत्र में मान - सम्मान के साथ कभी - कभी विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है |

मां के साथ संबंधों में थोड़ा उतार-चढ़ाव रह सकता है। 

वाहन के लिए और सरकारी नौकरी के लिए भी सूर्य ऐसी स्थिति शुभ मानी जाती है, और राजनीति के लिए भी शुभ परिणाम ही देते हैं 

सावधानी : माता पिता और संतान के सेहत का ध्यान रखे |

मेष लग्न के पंचम भाव में सूर्य

सूर्य यहाँ पर अपनी राशि सिंह में होंगे परिणाम स्वरूप ऐसे व्यक्ति की बुद्धि तेज होती है। ऐसे जातक कई विषयों की जानकार होते हैं और ऐसे लोगों के |

ज्यादातर लोगों की एक ही संतान होता है और बहुत ही प्रभावशाली संतान होता है,

संतान से सुख की प्राप्ति होती है । 

प्रेम के लिए थोड़ी सी परेशानी जरूर देते हैं , प्रेम जीवन में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं |

सावधानी : प्रेम में हैं तो अहंकार को बीच में ना आने दें 

मेष लग्न के छठे भाव में सूर्य

सूर्य यहाँ पर अपनी मित्र बुध की कन्या राशि में होंगे परिणाम स्वरूप सूर्य यहाँ पर बेहद ही शक्तिशाली शत्रु देते हैं हालांकि शत्रुओं से विजय भी दिलाते हैं

सूर्य यहाँ मजबूत स्थिति में होता है, इसलिए व्यक्ति अपने दुश्मनों को हराने में सक्षम रहता है। प्रतिस्पर्धा में जीतने की क्षमता बढ़ती है।

यहाँ सूर्य के वजह से  पेट, और  पाचन  से जुड़ी समस्या हो सकती है

सावधानी : ऋण लेने से बचें , और अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें 

मेष लग्न के सप्तम भाव में सूर्य

यहाँ पर सूर्य अपने नीच राशि तुला के होंगे तो वैवाहिक जीवन में तनाव और मतभेद रहते हैं, लेकिन आपका का जीवन साथी  आत्मविश्वासी और प्रभावशाली मिलता है,  ।

अगर वैवाहिक जीवन को छोड़ दें तो यह सूर्य की ऐसी स्थिति आपके व्यक्तितत्व के लिए भी बेहद प्रभावशाली बनाता है |

ऐसे व्यक्ति को किसी भी तरह के व्यवसाय में साझेदारी से बचना चाहिए |

सावधानी : अपने बच्चों पर क्रोध ना करे और पत्नी से प्यार से बात करे |

मेष लग्न के अष्टम भाव में सूर्य

यहाँ सूर्य पंचम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव में अपने परम मित्र मंगल की साधारण राशि वृश्चिक के होंगे तो 

गूढ़ विद्या, रिसर्च, ज्योतिष, मनोविज्ञान या रहस्यमय चीज़ों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

सूर्य पिता का कारक होता है, इसलिए अष्टम में होने पर पिता के साथ संबंधों में दूरी, मतभेद या पिता के स्वास्थ्य की चिंता हो सकती है।

अचानक स्वास्थ्य समस्याएँ या छुपी हुई बीमारियाँ हो सकती हैं। खासकर पेट, गुप्त अंगों या हड्डियों से जुड़े मुद्दे ध्यान देने योग्य रहते हैं।

यह स्थिति आयु को लेकर मिश्रित परिणाम देती है। कभी-कभी अचानक धन लाभ के योग भी बन सकते हैं।

सावधानी : सूर्य की दशा चल रही हो तो अपने स्वास्थ्य पर ध्यान रखे, चोट चपेट और सर्जरी होने के संभवना बनते हैं |

मेष लग्न के नवम भाव में सूर्य

यहाँ पंचमेश सूर्य परम मित्र गुरु की राशि नवम के धनु मे होंगे तो एक शुभ और शक्तिशाली स्थिति मानी जाती है, क्योंकि नवम भाव भाग्य, धर्म, गुरु, उच्च शिक्षा और लंबी यात्राओं का प्रतिनिधित्व करता है।

नवम में सूर्य होने से व्यक्ति भाग्यशाली होता है और जीवन में सही समय पर अवसर मिलते हैं। धर्म, नैतिकता और सिद्धांतों में विश्वास रहता है।

इस स्थान पर पिता से सहयोग, सम्मान या प्रेरणा मिलती है। गुरुजन भी जीवन में मार्गदर्शक बनते हैं।

समाज में मान-सम्मान मिलने के योग रहते हैं।

उच्च शिक्षा, दर्शन, कानून या प्रशासन से जुड़े क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। विदेश यात्रा या दूरस्थ स्थानों से लाभ भी संभव है।

धार्मिक कार्य, तीर्थ यात्रा या आध्यात्मिक ज्ञान की ओर रुझान रहता है।

सावधानी : भाई - बहनों से झगड़े से बचें | 

मेष लग्न के दशम भाव में सूर्य

यहाँ पंचमेश सूर्य दशम भाव में अपने परम शत्रु शनि की राशि मकर में होंगे तो अपनी राशि से छठे और आठवे के सबंध बनाएंगे जो की आपके प्रेम ' शिक्षा और संतान पक्ष के लिए कहीं से भी अच्छा नहीं है |

प्रेम लाइफ को संभालने की जरूरत है वहाँ से धोखा मिल सकता है और अपने अपने बच्चें और पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखे |

उपाय : सूर्य गायत्री मंत्र का नियमित जाप करें और सूर्य भगवान को सूर्याउदय के समय तांबे के लोटकी से अर्घ दें  |

मेष लग्न के एकादश भाव में सूर्य

पंचमेश सूर्य यहाँ एकादश भाव में अपने परम शत्रु शनि की कुम्भ राशि में होंगे और एकादश भाव आय ' इच्छाओं की पूर्ति और नेटवर्क/मित्रों का भाव है , यहाँ से बड़े भाई - बहनों को भी देखा जाता है |

एकादश में सूर्य होने से व्यक्ति को अपने प्रयासों से अच्छी कमाई और समय-समय पर लाभ मिलता है। करियर से आय में स्थिरता और ग्रोथ दिखती है |

ऐसे लोगों के संपर्क बहुत ही  मजबूत होते हैं | सूर्य का यहाँ होना जातक को अपने ज्ञान और बुद्धि के बल पर बहुत ही ज्यादा धन लाभ प्राप्त करता है |

जीवन में लक्ष्य पूरे करने की क्षमता रहती है। मेहनत के बाद इच्छाएँ धीरे-धीरे पूरी होती हैं।

सावधानी :बड़े भाई बहनों से सबंध अच्छे रखे |

मेष लग्न के द्वादश भाव में सूर्य

पंचमेश सूर्य द्वादश भाव में अपने मित्र गुरु की राशि मीन में होंगे तो पंचम भाव से आठवे भाव पड़ता है इसलिए मिश्रित फल जाने क्योंकि द्वादश भाव खर्च, विदेश, एकांत, हानि और आध्यात्मिकता से जुड़ा होता है।

द्वादश में सूर्य होने से खर्च अधिक रह सकता है—खासकर प्रतिष्ठा, यात्रा या आराम पर। यदि नियंत्रण न रखा जाए तो बचत कम हो सकती है।

शिक्षा के लिए घर से दूर रहना हो सकता है |

यही संतान को भी दूर जाकर के बसते हैं | आत्मचिंतन या आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर झुकाव हो सकता है।

यह स्थिति अंतर्ज्ञान के लिए अच्छा है |

यही आपके स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा नहीं है क्योंकि सूर्य की सीधी सप्तम दृष्टि आपके छठे भाव पर होगी 

सावधानी : अगर आपकी सूर्य की दशा चल रही हो तो अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य का ध्यान रखे | 

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